नगर पालिका बाड़ाहाट द्वारा वर्ष 2011 से पालिका में संविदा पर तैनात कर्मचारियों की कर्मचारी भविष्य निधि(ईपीएफ) जमा नहीं करने पर ईपीएफ कमिश्नर ने पालिका के सभी खाते सीज करने के आदेश दिए हैं। यदि 31 मार्च तक ईपीएफ के करीब 65 लाख रुपये जमा नहीं कराए गए तो पालिका को पैनल्टी समेत दोगुनी धनराशि जमा करानी होगी। इस वित्तीय संकट और खाते सीज होने से पालिका में हड़कंप मचा है।
भविष्य निधि संगठन आयुक्त द्वारा कई चेतावनियों के बावजूद नगर पालिका बाड़ाहाट द्वारा वर्ष 2011 से 2019 तक कर्मचारियों के ईपीएफ का पैसा जमा नहीं कराया। इसके चलते ईपीएफ कमिश्नर ने दो दिन पहले नगर पालिका बाड़ाहाट के सभी खाते सीज कर दिए हैं। जिसके चलते अब पालिका कर्मचारियों का वेतन एवं अन्य खर्चे निकालना मुश्किल हो गया है। आयुक्त के आदेश और नियमों के अनुसार यदि पालिका ने चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक ईपीएफ की बकाया करीब 65 लाख रुपये धनराशि जमा नहीं करायी तो इसके बाद 100 प्रतिशत पैनल्टी देनी होगी। पहले ही वित्तीय संकट से गुजर रही नगर पालिका अब इस नए संकट से परेशान है।
पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल ने स्वीकारा कि पालिका पर ईपीएफ का करीब 65 लाख रुपये बकाया है। जिसके चलते ईपीएफ कमिश्नर ने दो दिन पहले पालिका के सभी खाते सीज कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि ईपीएफ कटौती का यह मामला उनके कार्यकाल से पूर्व के दो पालिका बोर्डों का है। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि पालिका के संविदा कर्मियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती ही नहीं की गई। जिस कारण यह स्थिति आयी है। ईपीएफ का पैसा जमा कराने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही पालिका को इस वित्तीय संकट से उबारा जाएगा।
उत्तरकाशी से पंकज गुप्ता।