बीरपुर डुंडा गांव में रविवार अमावस की रात को बग्वाल (दीपावली) मनाने के साथ जाड भोटिया, खांपा एवं किन्नौरी समुदाय में लोसर पर्व की शुरूआत हो गई। सोमवार को समुदाय के लोगों ने बौद्ध पंचांग के अनुसार नए साल का स्वागत किया। इस दौरान घरों में विशेष पूजा-अर्चना कर एक दूसरे को हरियाली बांट कर नए साल की शुभकामनाएं दीं।
रविवार रात को समुदाय के लोगों ने घरों में चीड़ के छिलकों (डली) से बैंजोड़ा (मशालें) तैयार की। आटा गूंथ कर उसे मुठ्ठी में दबाकर पांचों अंगुलियों के निशान बनाए। जलती हुई मशालें लेकर लोग गांव के तिराहे पर पहुंचे। जहां मशालें विसर्जित कर रोग, दुख, दरिद्र एवं बुरे ग्रहों की शांति के लिए मुठ्ठी में दबाया हुआ आटा अपने शरीर पर घुमाकर अग्नि में विसर्जित किया। यहां से लोग छोटे-छोटे पत्थर उठाकर लौटे और एक दूसरे के घर जाकर सुख समृद्धि की कामना के साथ उन्होंने पत्थर भेंट किए। इस दौरान लोगों ने हर्षोल्लास के साथ बग्वाल मनाई। इस मौके पर भगवान सिंह राणा, नारायण सिंह नेगी, जसपाल रावत, हीरा सिंह, गोविंद खांपा आदि अनेक लोग मौजूद रहे।
सोमवार को समुदाय के लोगों ने बौद्ध पंचांग के अनुसार नए साल का स्वागत किया। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर लोगों ने घरों में आटा गूंथ कर इससे कैलाश पर्वत (डंग्या) और मवेशियों के आकार बनाकर उन्हें पूजा स्थान में स्थापित किया। घी और हरियाली से इसका पूजन करने के बाद समुदाय के लोगों ने एक दूसरे के घर जाकर हरियाली बांटते हुए नए साल की शुभकामनाएं दीं। लोसर के दिन डुंडा पहुंचे सीएम त्रिवेंद्र रावत को भी समुदाय के लोगों ने हरियाली भेंट की। गंगोत्री विधायक गोपाल रावत ने सभी लोगों को बौद्ध पंचांग के नए साल की शुभकामनाएं दीं।